Paints Notes

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मैं रावन, लंका का राजा, मैं वह रावण हूं जिसने अपने सीस रूपी पुष्प चढ़ा चढ़ा कर उमापति महादेव की पूजा की है। जब मेरा हाथ खड़क की ओर जाता है तो आसमान में लोकपाल भय से कांपते हैं। जिन भुजाओं ने स्वयं कैलाश को उठा दिया था उस भुजाओं के फड़कने मात्र से देवता गांधार और नक्षत्र भी भय से सांस लोग लेते हैं।